नियामक परिदृश्य
भारत के बायोमास ईंधन बाज़ार को आकार देने वाले नियम।
भारत में बायोकोल, पेलेट्स और ब्रिकेट्स के खरीदारों और आपूर्तिकर्ताओं के लिए सबसे ज़रूरी केंद्रीय योजनाओं, अनिवार्यताओं और नियमों का सरल सारांश — पृष्ठभूमि की जानकारी के लिए, कानूनी या कर सलाह के विकल्प के रूप में नहीं।
राष्ट्रीय जैव-ऊर्जा कार्यक्रम (2022)
जैव-ऊर्जा के लिए MNRE की मुख्य योजना, जो नवंबर 2022 में अधिसूचित हुई और वित्त वर्ष 2025-26 तक चलती है। इसमें तीन उप-योजनाएँ हैं: अपशिष्ट से ऊर्जा (शहरी, औद्योगिक और कृषि अपशिष्ट से बायोगैस, बायो-CNG और बिजली), बायोमास कार्यक्रम — पेलेट, ब्रिकेट और गैर-खोई सह-उत्पादन इकाइयों के लिए सहायता, जिस श्रेणी में A3 Energy आती है — और परिवार व सामुदायिक बायोगैस के लिए बायोगैस कार्यक्रम। चरण-I का परिव्यय ₹858 करोड़ है।
ताप बिजलीघरों के लिए बायोमास को-फ़ायरिंग नीति
विद्युत मंत्रालय द्वारा जारी यह नीति कोयला-आधारित बिजलीघरों के लिए बायोमास पेलेट्स की को-फ़ायरिंग अनिवार्य करती है — वित्त वर्ष 2024-25 से वज़न के हिसाब से 5%, जो वित्त वर्ष 2025-26 से बढ़कर 7% होगी — जिसमें धान की पराली, कपास के डंठल और सरसों के डंठल जैसे पात्र कृषि अवशेष उपयोग होते हैं। यह 25 साल या संयंत्र के परिचालन जीवन तक लागू रहती है, और आज भारत में बायोमास पेलेट्स की माँग का सबसे बड़ा स्थायी कारण है।
आर.के. सिंहविद्युत तथा नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री, 2017–2024 — मूल नीति और उसका 2023 का संशोधन जारी कियाजैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति, 2018 (2022 में संशोधित)
भारत के एथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य तय करती है — 2022 के संशोधन में 20% मिश्रण का लक्ष्य 2030 से पहले करके 2025-26 कर दिया गया — और जैव ईंधन उत्पादन के लिए पात्र कच्चे माल की सूची बढ़ाई गई, जिसमें कृषि अवशेष भी शामिल हैं।
SATAT और GOBARdhan (कंप्रेस्ड बायोगैस)
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने अक्टूबर 2018 में SATAT शुरू की, जिसका लक्ष्य देश भर में 5,000 कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) संयंत्र बनाना था। अगस्त 2026 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹23,731 करोड़ की एकीकृत राष्ट्रीय योजना GOBARdhan (वित्त वर्ष 2026-27–2035-36) को मंज़ूरी दी, जिसमें SATAT और संबंधित CBG सहायता को एक ढाँचे में जोड़ा गया।
धर्मेंद्र प्रधानपेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री — अक्टूबर 2018 में SATAT शुरू की
नरेंद्र मोदीप्रधानमंत्री — अगस्त 2026 में मंत्रिमंडल ने GOBARdhan को मंज़ूरी दीप्रधानमंत्री JI-VAN योजना
लिग्नोसेल्युलोसिक बायोमास — कृषि और वन अवशेष, औद्योगिक अपशिष्ट — पर चलने वाले दूसरी पीढ़ी (2G) के एथेनॉल संयंत्रों को प्रति व्यावसायिक परियोजना ₹150 करोड़ तक की वित्तीय सहायता देती है। 2028-29 तक बढ़ाई गई।
हरदीप सिंह पुरीपेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री, 2021 से — 2024 के विस्तार की देखरेख कीफ़सल अवशेष जलाने के नियम (CAQM अधिनियम, 2021)
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने NCR, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में फ़सल अवशेष को खुले में जलाने पर रोक लगाई है, जिसमें ज़मीन के आकार के अनुसार ₹30,000 तक का जुर्माना है। इसी नियामक पृष्ठभूमि के कारण किसानों और एग्रीगेटरों के लिए अवशेष को खेत में जलाने के बजाय पेलेट्स, ब्रिकेट्स और बायोकोल में बदलना नियमों के अनुरूप विकल्प बनता है।
GST और HSN वर्गीकरण
बायोमास ब्रिकेट्स और पेलेट्स HSN शीर्षक 4401 (और संरचना के अनुसार संबंधित कोड) के तहत वर्गीकृत होते हैं; लागू GST दर उत्पाद के सटीक वर्गीकरण पर निर्भर करती है। बिल बनाने से पहले अपने उत्पाद की मौजूदा दर अपने कर सलाहकार से या CBIC की प्रकाशित अनुसूची से पुष्टि कर लें।
राज्य फ़सल अवशेष प्रबंधन (CRM) सहायता
कई राज्य — जिनमें पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश शामिल हैं — ऊपर दी गई केंद्रीय योजनाओं के अलावा अवशेष-संग्रह उपकरणों (बेलर, रेक, हैप्पी सीडर) के लिए अपनी सब्सिडी योजनाएँ चलाते हैं। उपलब्धता और शर्तें राज्य और सीज़न के अनुसार बदलती हैं, इसलिए अपने सोर्सिंग क्षेत्र में क्या लागू है, यह संबंधित राज्य कृषि विभाग से पता करें।
को-फ़ायरिंग अनिवार्यता के तहत ईंधन चाहिए? मात्रा पर बात करें।
सेल्स टीम से बात करेंयह पेज सितंबर 2026 तक की सार्वजनिक नीति का केवल सामान्य जानकारी के लिए सारांश देता है — यह कानूनी, कर या अनुपालन सलाह नहीं है। नियम, दरें और योजनाओं की समय-सीमाएँ बदलती रहती हैं; व्यावसायिक या अनुपालन संबंधी फ़ैसले लेने से पहले MNRE, विद्युत मंत्रालय, CBIC या अपने सलाहकारों से मौजूदा आवश्यकताओं की पुष्टि करें। स्रोत: नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, विद्युत मंत्रालय, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा पत्र सूचना कार्यालय, भारत सरकार। हमारी जैव-ऊर्जा समयरेखा भी देखें। ऊपर की आधिकारिक तस्वीरें गवर्नमेंट ओपन डेटा लाइसेंस – इंडिया (GODL) के तहत भारत सरकार के प्रकाशन हैं, जिन्हें तथ्यात्मक संदर्भ के लिए दिखाया गया है — A3 Energy एक स्वतंत्र निजी कंपनी है, जो चित्र में दिखाए गए व्यक्तियों या मंत्रालयों से संबद्ध या उनके द्वारा समर्थित नहीं है।
